Chhattisgarhi kavita
नवा साल आवत हॆ
कुकरी बोकरा मन डर्रावत हे
का होही हमर जी के हाल
सोच के पानी भीतरी
मछरी घलो घबरावत हे
नवा साल आवत हे
मनखे मन खुशी मनाथे
नाचथे गाथे डी जे बजाथे
अउ दारू के नदियाँ बोहाथे
देख के ये तमासा ल
मूसवा घलो लुकावत हे
नवा साल आवत हे
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